हमारे आदर्श स्व. श्री माधव प्रसाद श्रीवास्तव जी का योगदान

एक समय था जब छतरपुर सिटी में दूर -दूर तक विधि शिक्षा का स्रोत नहीं था उस समय 1961 में विधि शिक्षा का छतरपुर में प्रारम्भ करे का श्रेय आपको जाता है. सीमित साधन होते हुए भी 1961 में श्री उमराव सिंह जी एवं श्री शिवनारायण खरे के नेतृत्व में अपने एक सफल टीम गठित की जिसमें तत्कालीन जिला कलेक्टर श्री एन.वी. कृष्णन एवं डिप्टी कलेक्टर श्री एल पी गुप्ता,श्री विष्णु प्रसाद श्रीवास्तव,श्री ठाकुर प्रसाद तिवारी,श्री जंग बहादुर सिंह,श्री सेठ गौरीशंकर सर्राफ,श्री सेठ अमरनाथ मल्होत्रा,श्री हरिराम मिश्रा,श्री सेठ दुर्गा प्रसाद,श्रीप्रकाश चंद्रा नवलकर,श्री माधव प्रसाद श्रीवास्तव,श्री आत्माराम पराडकर,श्री श्रीनिवास शुक्ल जी,श्री आत्माराम पराडकर, श्री नारायणदास अग्रवाल, श्री स्वरूपचंद जैन,श्री अशोक कुमार चौरसिया, तत्कालीन शासन प्रतिनिधि के साथ मिलकर छतरपुर में विधि महाविद्यालय की आधारशिला रखी जो आज सागर रोड पर पंडित मोती लाल नेहरु विधि स्नातकोत्तर महाविधालय के नाम से जाना जाता है इस महा विद्यालय का संविधान श्री माधव प्रसाद जी ने रचित किया एवं उस पर हस्ताक्षर किये. शिक्षा प्रसार समिति द्वारा संचालित इस महाविद्यालय के ख्याति समूचे भारत में विख्यात है इस हेतु आपके बड़े भाई श्री विष्णु प्रसाद श्रीवास्तव द्वारा भूमि दान कर आप 1975 से 2014 तक शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष रहे श्री माधव प्रसाद श्रीवास्तव जी 1995 से 2014 तक शासी निकाय के अध्यक्ष भी रहे और 2014 से आपने शिक्षा प्रसार समिति के संरक्षक की जिम्मेदारी निभाई. आपने छात्रो के विशेष आवाहन 1 जुलाई 1976 से लॉ कॉलेज में व्याख्यान प्रारम्भ किया आप सुबह से शाम तक न्यायलय का कार्य करते थे एवं शाम के समय महाविधालय आकर व्याख्यान देते थे. आप 20 जुलाई 1989 से 30 जून 2002 तक कॉलेज के प्राचार्य रहे. आपने विधि के छात्रों के चहुमुखी विकास के लिए महाविधालय में देश के विभिन्न विष्वविधालयों के प्रोफेस्सर एवं विधि विशेषज्ञों को आमंत्रित करते थे. तथा विभिन्न राष्ट्रीय सेमिनार भी आपने आयोजित करवाए, जो आज भी यथावत संचालित किये जा रहे है . विधि महाविधिले का विशाल पुस्तकालय समूचे मध्यप्रदेश में इकलौता है. जिसको सजाने और सवारने का काम भी अपने किया . विशाल पुस्तकालय भवन में 37 प्रकार के जनरलों का संग्रह किया गया है. आपने महाराज भवानी सिंह जूदेव से मिलकर रियासत काल की ऐतिहासिक लाइब्रेरी को भी विधि महाविद्यालय में समेकित करवाया जो महाराज विश्वनाथ सिंह पुस्तकालय के नाम से जानी जाती है जिसमे 200 वर्षो से अधिक पुरानी हस्तलिखित पाण्डुलिपि एवं पुस्तके रियासत काल की उपस्थित है. जिसका संचालन विधि महाविद्यालय करा रहा है यह देश विदेश के शोधार्थी आकर ज्ञान अर्जित करते है. आपके द्वारा यह महोबा रोड पर महतो प्रतोल पंप के समें एक और लॉ कॉलेज भवन परिसर का निर्माण करवाया गया जहां पर गर्ल्स हॉस्टल , इनडोर स्टेडियम, महाविद्यायल भवन आदि निर्मित हो चुके है. आपका सपना था की विधि का सम्पूर्ण शिक्षा छतरपुर में ही हो इसलिए आपने योगेन्द्र प्रताप सिंह जी वरिष्ठ अधिवक्ता एवं विधायक मानवेन्द्र सिंह जी के साथ मिलकर प्रयास किया और विधि में सनंतकोत्तर कोर्स भी महाविद्यालय में संचालित करवाया जिससे छात्र – छात्रों को कानून की सम्पूर्ण शिक्षा छतरपुर में ही उपलब्ध होने लगी जस्टिक श्री सुरेन्द्र गंगेले जो आज हाइकोर्ट में जज है वह अपने शिष्य रहे जो आज आज उच्च न्यायलय में कामयाबी के शिखर पर मध्यप्रदेश का नाम रोशन कर रहे है. आपके अनेकोनेक छात्र – छात्राये देश की विभिन्न सेवाओं में महारथ हासिल किये हुए है जिसमे मुख्य रूप से

  • श्रीमती प्रज्ञा पचोरी, जिला जज
  • श्रीमती शुब्रा पचोरी, जिला जज
  • श्री जितेन्द्र मिश्रा , ADJ
  • श्रीमती मञ्जुल देवी, मजिस्ट्रेट – नौगॉव
  • श्रीमती वंदना त्रिपाठी, मजिस्ट्रेट – छतरपुर
  • श्रीमती राखी नायक, मजिस्ट्रेट – बुरहानपुर
  • श्रीमती विश्वेश्वरी शुक्ला, मजिस्ट्रेट – सागर
  • श्रीमती वंदना सिंह, मजिस्ट्रेट – हटा
  • श्रीमती मिनी गुप्ता, मजिस्ट्रेट – सतना
  • श्री अरविंद सिंह , मजिस्ट्रेट – निवाड़ी
  • रोहिणी तिवारी , मजिस्ट्रेट – लवकुशनगर
  • हर्षिनी यादव , मजिस्ट्रेट – सतना
  • श्री अमित नागायच , मजिस्ट्रेट – शहडोल
  • श्री मनोज सोनी , मजिस्ट्रेट – पन्ना

स्व. श्री माधव प्रसाद श्रीवास्तव

madhavshrivastav

स्व. श्री माधव प्रसाद श्रीवास्तव

जन्म : 21 दिसंबर 1930
स्वर्गवास : 22 जनवरी 2017